Friday, November 20, 2009

माँ आप आ गई.....


पता है माँ ज़िन्दगी में एक अनमोल ज़रूरत है। इस बात को हमने हमेशा महसूस किया है। कल जब माँ पापा इलाहाबाद से आए तो मन को लगा आज बड़ा सुकून मिल गया है। पापा बाहर ही मिल गए और बोले "मेरी बिटिया आ गई "। माँ के कमरे का दरवाजा खोलते ही माँ का चहेरा देखा तो लगा इश्वर के दर्शन हो गए। माँ के पैरो को जब हमने छुआ तो लगा आत्मा को स्वर्ग मिल गया है। मन कर रहा था की माँ के पैरो में सर रखकर हमेशा के लिए सो जाए। जल्दी से कपड़े बदल कर माँ के पास गए तो देखा सिकंदर भैय्या माँ के पैर दबा रहे थे। हमने कहा भैय्या आप हटो हमको दबाने दो। माँ के पैरो को जब मेरे हाथ छू रहे थे तो लगता था की मेरा रोम-रोम कृतज्ञ महसूस कर रहा था माँ का। पता है हमारी दोनो माँ हमे २ जुलाई को मिली थी। एक माँ ने हमको जन्म दिया २ जुलाई को, दूसरी माँ ने २ जुलाई को ही हमको अपनाया था। २ जुलाई २००८ को हमने अपनी दूसरी माँ को पहली बार देखा था। माँ उस दिन हमसे कुछ बोली नही थी सिर्फ़ मेरी माँ से कहा की ज्योति को हमे दे दो। माँ मेरी शादी के pahale से ही घर आती थी, माँ जब भी shopping करने जाती थी हमको ले कर जाती थी। बोलती थी जल्दी तैयार हो चलना है। tab फिर क्या मैं कपड़े खोजना शुरू करती थी की क्या पहने क्योंकि मेरे पास एक भी सूट नही थे सब tom boy की तरह कपड़े थे मेरे पास। बस मेरे बाल लंबे थे इसलिए मैं लड़की लगती थी। माँ पापा pareshan होते थे की क्या होगा इस लड़की का। पर अब हमने अपने आप को बदल लिया है। अब कोई कह नही सकता है की यह वही ज्योति है। हाँ हम बात कर रहे थे माँ के बारे में कल रात को घर में आया देखा और दिल बोला "माँ आप आ गई हम कितने अकेले हो गए थे "। पता है मेरी माँ बड़ी भोली है, बड़ी प्यारी है, उन्हें सबका दर्द पता है , सबकी परेशानी समझ आती। वो किसी के आंसू नही देख सकती है उन्होंने हमको ऐसे अपनाया है की हमे कभी माँ की कमी खली नही। हाँ उन माँ की याद आती ज़रूर है पर उनकी कमी खलती नही है। सच में कभी लगता है हम बहुत सौभाग्यशाली हूँ। हमें नही लगता की हम माँ के बिना रह पाएंगे। कल रात में हम ऐसे सोये की एक सपने ने भी हमारी पलकों पर दस्तक तक नही दी। बिल्कुल निश्चिन्त होकर सो गए। सुबह उठे माँ के पास गए उनका प्यारा चेहरा देखा तो दिल ने तेज़ धडकनों के साथ कहा "माँ आप आ गई है अब जाना मत"। पर कल (रविवार) को माँ को वापस जाना है इलाहाबाद। आगे हम कुछ नही कह पा रहे है क्योकि आंख भर आई है।

16 comments:

  1. Bigdi kismat bhi sanwar jaegi
    Jindagi tarane khushi ke gayegi
    Uske hote kiska dar, wo duwao ka hai ghar
    wo hai maa...pyari maa...mammaa...

    Again a nice portrayal of feelings...
    I think mother is most important in your life...

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  2. That is very nice thinking...give me your email id so that i can forward you some nice e mail's.

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  3. माँ वाकई ईश्वरीय महिमायुक्त होती है. सारे दुख, सारे अवसाद माँ के सानिध्य मे हल्के हो जाते हैं.
    सुन्दर आलेख

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  4. bilkul sahi likha hai 'Ma' ke bare me..unhe sab pta hai aur pyaar ka sagar hoti hain :)

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  5. maa ke baare mein aapke vichar ekdam satya hai kripa kar maa ke baare mein mere bhi vichar padhe www.mdshadab.blogspot.com.comment karna na bhoole

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  6. मां की ममता का कोई जोड नहीं है। सब कुछ मिल सकता लेकिन मां का प्‍यार शायद ही मिलता है। सुख और दुख में सहारे के लिए मुख से मां ही निकलती है।

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  7. मां
    आगे लिखने के लिए मेरे पास कोई शब्द नहीं मिल रहे हैं

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  8. aaj ke jmane me maa to apne bchchon ke bare me jo bhav rkhte hai vhi pyar wala bhav ab ke bachchon me kam hi paya jata hai ..is liye yh ap pr sahi ho sakta hai .. lekin jo smaj me aap ke aas pas ho rha hai use bhi najarandaj nhi kiya ja sakta hai .../???achchha prays hai ....

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  9. क्या टिप्पणी दूं . हमेशा की तरह शानदार रचनायें. मार्मिक संवेदनशील.

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  10. Pahli baar aayi hun aapke blogpe aur behad achha aalekh padhne mila!

    http://shamasansmaran.blogspot.com

    pe "maa, pyaree maa" ye aalekh hai..aap padhengee to mujhe badee khushee hogi..
    Is aalekh ke poorv ek maa ke nazarse maine apni betee pe likha hai, kahen guftagu kee hai!

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  11. माँ पर एक अनमोल पोस्ट
    बहुत बहुत आभार

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  12. Caveman sometime do not understand that the motherhood or mother is an overblown myth, a real virtue or a natural state. Mother of every species is the same but they never flaunt. I found it discrimination against fatherhood as it is unique to human species only. Don't make a natural thing in to an virtue.

    Again it is Caveman's opinion, not intended to hurt anyone's belief.

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